छोटी दिवाली : नरक चतुर्दशी

छोटी दिवाली : नरक चतुर्दशी का महत्व

छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी, नरक चौदस, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी के नामों से जाना जाता है. इस दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है. इसे छोटी दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है इस दिन संध्या के बाद दीपक जलाए जाते हैं और चारों ओर रोशनी की जाती है.

नरक चतुर्दशी का पूजन अकाल मृत्यु से मुक्ति और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए किया जाता है. एक पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन नरकासुर का वध करके, देवताओं और ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलवाई थी.

मान्यता है कि बजरंग बली का जन्म भी इसी दिन हुआ था। पोराणिक मान्यताआें के अनुसार इस दिन अर्धरात्रि में हनुमान जी का जन्म अंजनी माता के गर्भ से हुआ था। यही कारण है कि हर तरह के सुख, आनंद और शांति की प्राप्ति के लिए नरक चतुशी को बजरंग बली हनुमान की उपासना लाभकारी होती है। इस दिन शरीर पर तिल के तेल की उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद हनुमान की विधि विधान से पूजा-अर्चना करते हुए उन्हें सिंदूर चढ़ाना चाहिए।

इस दिन घर की सफाई अवश्य करें आैर हर प्रकार का टूटा-फूटा सामान फेंक दें। दीवाली के समय घर सजाने के लिए जो भी सामग्री आर्इ हो उससे संबंधित सामान जैसे खाली पेंट के डिब्बे, रद्दी, टूटे-फूटे कांच या धातु के बर्तन, किसी प्रकार का टूटा हुआ सजावटी सामान, बेकार पड़ा फर्नीचर व अन्य प्रयोग में न आने वाली वस्तुओं को यमराज का नरक माना जाता है इसलिए ऐसी बेकार वस्तुओं को घर से हटा देना चाहिए। उसके साथ ही ध्यान रखें कि यदि सफाई के बाद कूड़ा घर के सामने ही बाहर फेंक दिया गया तो इससे राहु का सामना करना पड़ता है इसलिए कूड़े को नियत स्थान पर ही डालें। यदि घर के बाहर गंदगी फैली है तो स्वच्छ करा दे अन्यथा लक्ष्मी के आगमन में बाधा होगी। यदि घर में जूते चप्पल बाहर अस्त-व्यस्त पड़े रहते हैं तो उसे तुरंत नियत स्थान पर रख दें अन्यथा पारिवारिक सदस्यों की तरक्की रुकने का भय रहता है। यदि घर के बाहर सड़क को साफ कर दिया जाए तो दंडाधिकारी शनि प्रसन्न होते हैं।

 

 

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